डिस्टिक रजिस्ट्रार अनिल चौधरी की दूरदर्शी सोच से सांप तो मरता नहीं लेकिन लाठी टूट जाती है!

फरीदाबाद के डिस्टिक रजिस्टार ऑफ सोसाइटी अनिल चौधरी यहां पर जाना पहचाना नाम है क्योंकि वह करीब करीब दो दशकों से फरीदाबाद में ही अपनी पोस्ट पर काबिज हैं और चाहे कितनी सरकारें रही हूं उनकी सब में जय-जयकार होती है और उनको उनके सिंहासन से कोई नहीं दिखा पाया है खैर इस बारे में हम आपको बाद में बताएंगे. और यह भी बताएंगे कि किस लिए और क्यों उसने अपने चहेते को इतनी बड़ी पोस्ट पर बिठा दिया
आज जो हम बताना चाह रहे हैं कि कुछ दिन पहले हमारी खबर के बाद अनिल चौधरी जी ने उस पर संज्ञान लिया जिसमें एक सोसाइटी में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना के तहत अवैध निर्माण की शिकायत की गई थी.
इसी के चलते उन्होंने एक आदेश पारित किया जिसमें अवैध निर्माण को तुरंत प्रभाव से रोकने का आदेश था .
अब इसे खाली अनिल चौधरी जी की लाठी कहें या कुछ और क्यों की जब हमारे सहयोगी की चौधरी साहब से बात हुई तो उन्होंने कहा की यह मामला मेरे संज्ञान में अभी आया है और इसको 1 घंटे के अंदर मैं तुरंत प्रभाव से बंद करवाता हूं .
लेकिन जब हमारी चौधरी साहब से अगले दिन बात हुई  तो उन्होंने कहा एसआरएस रेजिडेंसी सेक्टर 88 फरीदाबाद का  ऐड हॉक  प्रमुख फोन नहीं उठा रहा है
मैंने उसको मैसेज भेजवा दिया है कि काम को तन प्रभाव से रोक दिया जाए लेकिन इस संदेशे में विशेष यह था कि उन्होंने 2 दिन की ऐसी ढील दी कि उसमें उसने अपना कार्य लगभग  पूरा कर लिया.

और इसका प्रमाण एडहॉक कमेटी के प्रमुख के चेले ने रात को अपनी गतिविधियों का बखान करते हुए सभी को शेयर किया कि आज टॉयलेट निर्माण कंप्लीट होने को है

और चौधरी साहब ने भी आदेश देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा कर अपनी गर्दन बचा ली और ठीक ढाई दिन बाद उन्होंने निर्माण कार्य रुकवाने के आदेश जारी कर दिए इसी को कहते हैं कि चौधरी साहब की लाठी टूट जाती है और सांप भी नहीं मरता

इसका मतलब यह है कि वह एक सरकारी आदेश देकर खानापूर्ति कर देते हैं लेकिन पार्टी को इतनी भीड़ दे देते हैं कि वह आदेश मात्र कागज के टुकड़े रह जाते हैं और पार्टी अपना कार्य कर लेती है
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