एक करीबी अधिकारी सहित 70-80 अधिकारियों के होंगे तबादले , khattar Government in Action Mode !

zeeharyana.com/Narender Sharma :पिछले दिनों हुए पांच राज्यों के चुनाव देश की राजनीति को एक अच्छी दिशा दे गए। चुनावों में जहां एक बार सपा-कांग्रेस एवं मायावती को बड़ा झटका लगा, वही दूसरी तरफ  पंजाब में बादलों का सफाया हो गया।  जिसे पंजाब प्रांत के हित में माना जा रहा है

उधर योगी आदित्यनाथ ने जो काम उत्तर प्रदेश में शुरु किया है वह सुलझे हुए खिलाड़ी की तरह है। भ्रष्टाचार को उन्होंने अपना निशाना बनाया है तथा प्रशासन की नाकामी भी को चुस्त दुरुस्त करने के लिए उन्होंने अभी से अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं कि अब वह सब कुछ नहीं चलेगा जो अब से पहले की सरकारे कर रही थी।  एक वर्ग विशेष की संतुष्टि एवं जाति विशेष की सरकार बन कर रह गई थी।  योगी जी ने अभी से जो फिल्म का ट्रेलर दिखाया है वह तो यहीं जाहिर कर रहा है कि उनका कोई मुकाबला नहीं है। शायद यह सरकार कल्याण सिंह की सरकार से भी प्रशासनिक पकड़ में ज्यादा अच्छी साबित हो।

अब बात आती है पंजाब की जहां कैप्टन साहब जो कि कभी राजा के रूप में जाने जाते थे पिछली सरकार उन्होंने मस्ती से चलाई थी ।इनकी सरकार मे भी वैसा ही चलता रहा जैसा कि बादल सरकार में चलता था । आरोप तो यह भी लगे थे कि कैप्टन और बादल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं दोनों के बीच एक अदृश्य संबंध है इसी का नतीजा रहा कि पहली बार पंजाब में चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी पहली बार में इतनी सीटें ले गई। यदि भाजपा और बादल कैप्टन पर मेहरबान ना होते तो आज शायद पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार होती, परंतु इस बात एक बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है ।अबकी बार लगता है कि शायद कैप्टन साहब बादल का अनुसरण करने की वजह प्रशासन पर ध्यान दे रहे हैं ।उन्होंने भी पिछले 10 दिनों में प्रशासनिक चुस्ती दिखानी शुरू कर दी है। योगी जी से इन्हें भी सबक मिलने लगा है कि मौज मस्ती ज्यादा की तो बादल तो शायद आगे सरकार में ना लौटे लेकिन आम आदमी पार्टी जरूर बुढ़ापे में उन्हें जेल में डाल सकती है।

इन सब का असर हरियाणा की खट्टर सरकार पर भी पडने लगा है। चर्चा है कि हरियाणा की अफसरशाही में आज-कल में एक बड़ा फेरबदल होने जा रहा है जिसमें CM के करीबी एक आला अफसर सहित 70-80 अधिकारियों के ट्रांसफर की बात कही जा रही है माना जा रहा है। कि विधायकों की नाराजगी के चलते मजबूरी में मुख्यमंत्री को अपना चहेता अधिकारी बदलना पड़ रहा है । शुरू से ही इस अधिकारी के CM के  निजी स्टाफ में लगने के बाद  से ही चर्चा थी कि बिरादरी वाद के कारण या फिर इमानदार दिखाकर जेब भरने के कारण  इस अधिकारी को यह पोस्टिंग मिली । इस अधिकारी की छवि के बारे में बात करें  तो अभी तक  इस अधिकारी का जो भी कार्य क्षेत्र रहा वहां इस ने जमकर पैसे कमाए और अपने नए दलाल पैदा कर दिए । खट्टर साहब को तो मुख्यमंत्री का पद तोहफे में मिला यह जगजाहिर है, परंतु विधायकों का क्या कसूर है जिन्होंने मेहनत करके जैसे-तैसे चुनाव जीता था । अब आगे की उम्मीद ना के बराबर है। ऐसे में विद्रोह होना स्वाभाविक है क्योंकि अधिकारी की संतुष्टि एक  पार्टी के सत्ता नाश का कारण बन सकती है।

UP में योगी सरकार एवं पंजाब में कांग्रेस की सरकार ने लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए ईमानदारी एवं प्रशासनिक पकड़ को मजबूत करना शुरू कर दिया है। आपका दास आपकी भी मजबूरी है कि ऐसे फैसले ले जिससे भ्रष्टाचार बंद हो और ढीली-ढाली चल रही सरकार को शक्ति से चलाया जाए। आज की स्थिति हरियाणा कि यह है कि भ्रष्टाचार के मामले में जहां लोग कांग्रेस को कोसते थे, वह लोग अब भाजपा में वोट देकर अपने सर में हाथ मार रहे हैं। क्योंकि भ्रष्टाचार डेढ़ से प्रशासन में सुनने वाला कोई नहीं 2 गुना तक बढ़ गया है। अभी तक यह चल रहा है अगर किसी को कोई पोस्टिंग पानी है तो CM कहते इस अवसर को सीधे के दलालों द्वारा खुश  करना पड़ता है, तभी पोस्टिंग मिलती है ।मुख्यमंत्री क्योंकि ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते हैं, लेकिन अगर कोई उस अधिकारी की शिकायत भी करता है तो वह ध्यान नहीं देते।उधर जाटों की वजह से मुख्यमंत्री एवं सरकार की हालत पतली है ऐसे में यदि करनी और कथनी एक नहीं की गई तो या तो मुख्यमंत्री को राज से हाथ धोना पड़ेगा या फिर भाजपा को  हरियाणा को भूलना।

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