ED का छापा सरकार की दुर्भावना या पहले ही लीक हो गयी सुचना

zeeharyana.com/Narender Sharma: पिछले 3-4 दिन पहले कोंग्रेस के एक विधायक पर ईडी का छापा लगा। ईडी भारत सरकार की एक एजेंसी है जो मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कार्रवाई करती है, साथ ही इस एजेन्सी को गिरफ्तार करने की भी शक्ति होती है। छापे में ईडी खाली हाथ लौटी , वो भी एक भी पैसे की गड़बड़ी साबित करने में नाकाम होकर।
अब यहाँ दो  सवाल यह पैदा होते हैं। पहला- छापे की सूचना लीक होने से सरकार नाकाम हो गई ?? दूसरा- छापा दुर्भावना की नीयत से मरवाया गया?? दोनो ही मामलों में नाकामी सरकार की ही है क्योंकि छापा मात्र खानापूर्ति के लिए या डराने के लिए था तो भी पूर्ण रूप से गलत था ओर अगर जानकारी लीक हुई तो यह साबित होता है कि केंद्रीय एजेंसियों पर मोदी जी की पकड़ नही है। क्योंकि मोदी जी दहाड़ कर कहते हैं कि उन्हें सभी मामलों की समझ है लेकिन इस मामले में सरकार जीरो साबित हुई। सत्ता में आने से पह्ले मोदी जी कोंग्रेस को चोर करार दे चुके थे। अब भाजपा सरकार बने तीन साल गुजरने को हैं, लेकिन कथित चोर पार्टी की हाईकमान के यहाँ कोई चूहा भी नही पकड़ा गया। कहीं ऐसा तो नही कि अब सत्ताधारियो को डर सताने लग गया है??, लेकिन डर किस बात का?? क्या यह डर सत्ता जाने का है?? चुनाव के वक्त मोदी जी ने अपने 56 इंच के सीने को तान कर कहा था कि सभी चोर जेल जाएंगे। जनता से वादे किए थे महंगाई कम की जाएगी, लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद महंगाई डेढ़ गुना तक बढ़ चुकी है। इन दिनों ईवीएम पर भी सवाल उठ रहे हैं अगर सरकार सही है तो बैलेट से चुनाव कराने में परेशानी क्या है??
उधर कश्मीर का एक वीड़ियो इन दिनों वायरल हो रहा है,  जिसमें एक सीआरपीएफ जवान को कश्मीर और पाकिस्तान के गुंडे पीट रहे हैं और देश का जवान असहाय महसूस कर रहा है। अब कहाँ गया 56 इंच का सीना?? क्योंकि अब 26 इंच के सीने (मनमोहन सिंह) के समय भी किसी गद्दार की औकात नही थी कि जवानों से इस तरह का बर्ताव कर सके।  शर्म आती है ऐसी वीडियो देखकर।  अब कहाँ है राष्ट्रभक्ति?? कहाँ गया ऐसे देशद्रोहियों को सबक सिखाने का साहस ??  देश के लिए जान की बाज़ी लगाने वाले सैनिकों को आत्मसम्मान की रक्षा करने का अधिकार क्यों नही है। क्या इसके लिए भी अमेरिका, रूस या किसी और देश से इज़ाज़त लेने की ज़रूरत है। एक तरफ तो मोदी जी कश्मीर से धारा 370 हटाने की बात कहते थे, वहीं अब कश्मीर में सैनिकों की दुर्दशा हो रही है। उस समय मोदी जी पानी पी पी कर कोंग्रेस को कोसते थे, अब तो सब कुछ आपके हाथ है, कुछ करते क्यों नही। मोदी जी ये 125 करोड़ लोगों का देश है। कम से कम जनभावना का ख्याल तो करो। सत्ता तो भाग्य का खेल है। हर बार जनता से वोट लेना आसान नही है। खुद को राष्ट्रभक्त बोलने से कोई राष्ट्रभक्त नहीं होता, राष्ट्रभक्ति साबित भी करनी पड़ती है। और जो यह बात साबित कर देता है उसे लोगों को बताने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

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