डी. ए. वी. शताब्दी काॅलेज फरीदाबाद में ई- लर्निग फाॅर टीचिंग एण्ड रिसर्च विषय पर कार्यशाला

फरीदाबाद : (zeeharyana.com/Sunita Sharma) एन एच -३ स्थित  डी. ए. वी. शताब्दी काॅलेज फरीदाबाद में  ई- लर्निग फाॅर टीचिंग एण्ड रिसर्च विषय पर समस्त शिक्षकों के लिए एम. डी. यू. रोहतक के वाणिज्य विभाग के भूतपूर्व प्रोफेसर एण्ड हैड (अध्यक्ष) और डीन एकेडिमक अफेयरस एवं वर्तमान में दिल्ली स्कूल ऑफ़  प्रोफेशनल स्टडीस एण्ड रिसर्च इंस्टिट्यूट   के निर्देशक डा. रविन्द्र विनायक मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। प्रो. विनायक ने पीपीटी के माध्यम से बड़ी सहजता से और व्यवस्थित रूप से वर्तमानमें शिक्षण में ई- लर्निग की भूमिका और महत्ता के विषय में बताया।
उन्होनें सांख्यिकी आंकड़ों  के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारतीय अर्थव्यस्था की उपस्थिति में सभी को परिचित कराया। भारत की अर्थव्यवस्था में जी डी पी की वृद्धि दरों में नोटबंदी और जी. एस.टी. जैसे दो मुख्य कारकों से आये उतार चढ़ाव को बताते हुए प्रो. विनायक ने भारत की ताकत और कमजोरियों पर चर्चा की। उनहोनें बताया कि आज भी भारत सूचना एवं संवहन तकनीकी (आई सी. टी.) के क्षेत्र में और शिक्षा के क्षेत्र में अन्य देशांे से काफी पीछे है अतः हम सभी शिक्षकगणों को अपनी शिक्षण तकनीकी में अधिक सक अधिक आई सी. टी. टूल्स और टेकनीक्स ई- लर्निग का प्रयोग करना चाहिए। कार्यशाला में टीचिंग और रिसर्च में प्रयोग किये जाने वाले नये-नये स्रोतों के विषय में बताया गया जिनके प्रयोग से     टीचिंग लर्निंग के क्षेत्र में शिक्षक अपने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक जानकारी प्रदान कर पायेगा और शोध में सृजनात्मकता को बनाए रख पायेगा और शोध में सृजनात्मकता को बनाए रख पायेगा। अंत में प्राचार्य महोदय ने मुख्य वक्ता को धन्यवाद दिया और समस्त सीनियर प्रोफेसर और शिक्षकों को कार्यशाला से अर्जित ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग करने के लिए अभिप्रेरित किया। प्राचार्य महोदय ने बताया कि वर्तमान में काॅलेज और स्कूलों में अधिकतर छात्रों की अनुपस्थिति का मुख्य कारण यह है कि वे सभी ऑन लाइन के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करना अधिक पसंद करते है। अतः यदि हम कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाना चाहते है तो शिक्षकों  को ई-लर्निग के माध्यम से अपनी शिक्षण विधि को और अधिक सुदृढ़ बनाना चाहिए।
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