नहीं किया भू माफिया पार्षद ने किसी का भला, जिसने इसकी टिकट की पैरवी की सबको छला !

 

स्वयंभू पार्षद ने अपनी टिकट के जुगाड़ में ना जाने कितने वीर और शेराओ के हाथ पाँव जोड़े और उन्हें अपनी पैरवी के लिए दोनों मंत्रियो के दर पर लेकर गया। लेकिन इन हरे वीरो और शेराओ को क्या पता था की जिनकी वो पैरवी कर रहे है वो ही इनके लिए आस्तीन का सांप बन जाएगा। हुआ यु की नहरपार हरे वीरो और शेरा की टूटी बोलती है और उन्ही के रहमो करम पर इसने मोटा धन अर्जित कर लिया और वो भी सब कच्चे के खेल में। लेकिन जब ईमानदार मंत्री ने इस भूमाफिया को कमीशन खाने को लेकर झाड़ लगाई तो इसने नोट कमाने का दूसरा जरिया देखने लगा। जहाँ जहाँ बिना नक़्शे के इसके हरे वीरो और शेरा के साथ साथ अपने गाँव वालो को भी नहीं छोड़ा जहां इनके काम होते तो खुद ही ये नरक निगम में शिकायत कर देता और उनको तुड़वाने की एवज में अपना काम भी सेट कर लेता। लेकिन ये बात जैसे ही हरे वीर को पता चली तो इसकी जूतमपैजार होने को हो गयी। मगर ये भी क्या करता वो बड़ी मछली है जिसने इसको काम करना सिखाया आज ये उस बड़ी मछली को खाने के चक्कर में लग गया। जब इसको पता चला की ये उससे पार नहीं पा सकता तो इसने उन दोनों को नुसकान करवाने की ठान ली। जिससे ये खुद ही शिकायत करवाता और फिर उनके साथ जाकर भला बन जाता लेकिन अब देखना है ये ये दोनों धुरंदर कब तक इसके इस नाटक को समझ पाते है। ऐसी तरह से ये ईमानदार मंत्री जी के नाम का भी पलीता करने में लगा है

क्रमश :

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