वाईएमसीए युव उत्सव एंव एनजीओ मेला में मानसिक रोग पर हुई चर्चा

गुड़गांव, (Keshav Thakur)। बेटी बचाओ, सबको पढ़ाओ थीम पर आधारित वाईएमसीए एनजीओ मेला में संबध हैल्थ फाउडेशन की और से स्टाल लगाकर मानसिक रिकवरी कार्यक्रम पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सिजोफ्रेनिया और बायपोलर पीड़ितो के द्वारा बनाई गई सामग्री को स्टाल में शामिल किया गया वंही इस पर चर्चा भी की गई। मेले में विभिन्न प्रतियोगिताअेां का भी आयेाजन किया गया।
 
सम्बन्ध हैल्थ फाउन्डेशन की ट्रस्टी रीता सेठ ने बताया कि वाईएमसीए युव उत्सव एंव एनजीओ मेला प्रतिवर्ष आयेाजित किया जाता है। जिसमें बेटी बचाओ थीम पर आधारित डांस, रंगोली, स्ट्रीट प्ले से संबधित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें सिजोफ्रेनिया और बायपोलर से पीड़ितों के द्वारा बनाए गए सामान की स्टाल  लगाई गई। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से सबंधित प्रदर्शनी, प्रचार सामग्री, वंहा आने वाले लोगों की समस्याअेंा समाधान के बारे में मौके पर ही बताया गया।
 
उन्होने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत की 10 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी मानसिक बीमारी से पीडित है जिनमे से 3 प्रतिशत गम्भीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है। हरियाणा में सात लाख लोग गंभीर मानसिक रोगों से पीड़ित है जिसमें से अकेले गुडगॉव मे करीब 50,000 से अधिक लोग इससे पीड़ित है। इन मामलो मे 50 प्रतिशत लोगों का इलाज भी नही हो पाता है। जिस प्रकार से मधुमेह, अग्न्याश्य मे रासायनिक परिवर्तन के कारण होता है वैसे ही मानसिक बीमारी भी मस्तिष्क मे रासायनिक परिवर्तन के कारण होती है और इसका इलाज सम्भव है। अनुमान है कि भारत की करीब 1.2 प्रतिशत आबादी स्किजोफ्रेनिया से ग्रस्त है और हर एक हजार वयस्क लोगों में से करीब 12 लोग इस बीमारी से पीडित होते हैं। 
 
वाईएमसीए के बोर्ड के  जान ने सिजोफ्रेनिया और बायपोलर से पीड़ितों के द्वारा बनाए गए सामान की प्रदर्शनी को देख उनके द्वारा किए गए कार्य की प्रशसा की और कहा कि मानसिक रोगियों का रिकवरी कार्यक्रम से ठीक होकर अपनी दिनचर्या का सामान्य बनाना अपने आप में बड़ा काम है और इसे बड़े पैमाने पर करने की जरुरत है। समाज में इस प्रकार की बीमारी का लोग आज भी इलाज कराने में असमर्थ है। इसके पीछे सामाजिक कारण भी प्रमुख है। इसलिए इसमें रिकवरी कार्यक्रम अह्म भूमिका निभा सकता है। 
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